Monday, November 4, 2019

मैं सत्य हूँ

मैं सत्य हूँ,
और,
सत्य ही रहूंगा,
दबा सकते हो,
कुचल भी दोगे,
तोड़ सकते हो,
मेरे अभिमान की रीढ़ को,
और
दबा सकते हो,
हज़ारो फ़ीट नीचे धरा के,
और
झूठे महल खड़े कर लोगे,
मेरी छाती पर,
पर
जिस दिन उठूंगा,
उस दिन,
सत्य की कुदाल
सत्य को बाहर निकालेगी,
और,
शाश्वत हो उठूँगा,
सैंधव सभ्यता की तरह,
मेरी हड्डियों के कंकाल,
गवाही देंगे चीख कर,
और ख़ून के धब्बे
तब भी ताज़ा रहेंगे
मेरे शरीर और तुम्हारी कमीज़ पर,
चीख उठेंगे
जो,
कल तक मुर्दे बने थे,
कि,
खून मेरा हुआ था,
मैंने किया नही,

तुम्हारी काली अदालतों के फरमान
झूठे साबित होंगे,
जब हटेगी मिट्टी,
शाश्वत सत्य से,
और
झूठ के महल 
ताश के पत्तों की तरह,
उड़ कर बिखर जाएंगे

-अरविंद 'काफ़िर'

5 comments:

  1. अति सुंदर, सत्य के असली रूप से आपने क्या खूब रूबरू कराया है, इसी लिए तो किसी ने कहा है, सत्यमेव जयते ।

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